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पीआईडी कà¥à¤¯à¤¾ है?
पीआईडी ​​या पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ बीमारी à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो महिला पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है जिसमें गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯, अंडाशय, फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब और शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ के अंदर शामिल होते हैं। अकà¥à¤¸à¤°, इस बीमारी के कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं हो सकते हैं।
पीआईडी के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
पीआईडी ​​किसी à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ लकà¥à¤·à¤£ का कारण नहीं बनता है। हालाà¤à¤•ि, यदि आप इनमें से किसी à¤à¥€ हलà¥à¤•े लकà¥à¤·à¤£ का निरीकà¥à¤·à¤£ करते हैं, तो जांच करवाना बेहतर है।
शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ या निचले पेट के आसपास दरà¥à¤¦
डिसà¥à¤ªà¥‡à¤°à¥‚निआ
पेशाब करते समय दरà¥à¤¦ होना
पीरियडà¥à¤¸ के बाद और सेकà¥à¤¸ के बाद बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग
हैवी पीरियडà¥à¤¸
दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• पीरियडà¥à¤¸
पीले या हरे रंग का असामानà¥à¤¯ रूप से योनि सà¥à¤°à¤¾à¤µ खासकर
कà¥à¤› अनà¥à¤¯ गंà¤à¥€à¤° लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
पेट में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦
उचà¥à¤š बà¥à¤–ार
बीमार महसूस करना
सदमे के संकेत
इनमें से कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ और लकà¥à¤·à¤£ अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जैसे à¤à¤ªà¥‡à¤‚डिसाइटिस और à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¥€ देखे जाते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार, विकार के निदान के लिठचिकितà¥à¤¸à¤¾ सहायता लेनी चाहिà¤à¥¤
पीआईडी के कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
पैलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डिजीज (पीआईडी) ऊपरी महिला जननांग पथ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होती है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ योनि और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯, फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब और अंडाशय तक फैल जाता है।
यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£ (à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆ): पीआईडी ​​के 4 में से 1 मामले à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆ के कारण होते हैं जैसे माइकोपà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾ जेनिटलियम, कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ टà¥à¤°à¥ˆà¤•ोमैटिस या गोनोरिया पीआईडी ​​के 75-90% मामलों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मौजूद होते हैं। ये आमतौर पर केवल गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करते हैं और à¤à¤•ल-खà¥à¤°à¤¾à¤• à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इलाज किया जा सकता है। यदि अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ ऊपरी जननांग पथ तक बढ़ सकता है और पीआईडी ​​में परिणाम कर सकता है।
अनà¥à¤¯ कारण: कà¥à¤› मामलों में, योनि में मौजूद बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ ऊपर की ओर फैलते हैं और पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनते हैं। हालांकि ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योनि में हानिरहित होते हैं, लेकिन वे शरीर के अनà¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण हो सकते हैं। यह अधिक सामानà¥à¤¯ है यदि आपके पास पीआईडी, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की गड़बड़ी, गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ या आईयूडी समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¨ का इतिहास रहा है।
पीआईडी ​​विकसित करने की अधिक संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ वाले लोग निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं:
जिनके कई सेकà¥à¤¸à¥à¤…ल पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° हैं
नठसेकà¥à¤¸à¥à¤…ल पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° है
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆ का इतिहास
अतीत में पीआईडी ​​का इतिहास
जो 25 वरà¥à¤· से कम आयॠके हैं
जिनके कम उमà¥à¤° में यौन सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ हैं
पीआईडी के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ पीआईडी ​​पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाने वाले फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब में निशान ऊतक और फोड़ा संगà¥à¤°à¤¹ का कारण बनता है। इसका यह à¤à¥€ कारण हो सकता है:
à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾: पीआईडी ​​से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ निशान ऊतक गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में à¤à¥à¤°à¥‚ण के आरोपण को रोक सकता है, बलà¥à¤•ि इसे टà¥à¤¯à¥‚ब में ही पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤¿à¤¤ करके टà¥à¤¯à¥‚बल गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का कारण बनता है। यह रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प जीवन के लिठखतरनाक हो सकता है और मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है।
बांà¤à¤ªà¤¨: पीआईडी ​​पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करता है और निषेचन की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। जितनी बार पीआईडी ​​हà¥à¤ˆ, बांà¤à¤ªà¤¨ का खतरा उतना ही अधिक था। इसके अलावा, पीआईडी ​​के विलंबित उपचार से बांà¤à¤ªà¤¨ हो सकता है।
कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• पेलà¥à¤µà¤¿à¤• दरà¥à¤¦: अनà¥à¤¯ पेलà¥à¤µà¤¿à¤• अंगों का फड़कना, विशेष रूप से फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब संà¤à¥‹à¤— या ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दौरान गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ का कारण बनता है।
टà¥à¤¯à¥‚बो-डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थि फोड़ा: पीआईडी ​​टà¥à¤¯à¥‚ब और अंडाशय में à¤à¤• फोड़ा बनाता है। यदि अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है, तो यह जीवन के लिठखतरनाक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो सकती है।
पीआईडी की गंà¤à¥€à¤° जटिलताà¤à¤ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
पैलà¥à¤µà¤¿à¤• सूजन की बीमारी यदि अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दी जाती है तो गंà¤à¥€à¤° जटिलताà¤à¤‚ हो सकती हैं। जटिलताओं में से कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
रोगी को गंà¤à¥€à¤° शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ दरà¥à¤¦ महसूस हो सकता है जो कà¥à¤› महीनों से लेकर सालों तक रह सकता है।
यह निशान पैदा कर सकता है जो ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन या संà¤à¥‹à¤— की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान दरà¥à¤¦ पैदा कर सकता है।
à¤à¤• अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– जटिलता असà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का विकास है। पीआईडी के कारण होने वाला निशान ऊतक फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ के लिठनिषेचित अंडों में बाधा के रूप में कारà¥à¤¯ करता है ताकि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में आरोपण हो सके। इस तरह के à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ से गंà¤à¥€à¤° रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ हो सकता है और इस पà¥à¤°à¤•ार आपातकालीन उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
पीआईडी ​​जब अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है तो ऑरगेंस फेलियोर हो सकती है और बांà¤à¤ªà¤¨ हो सकता है।
इससे फोड़ा à¤à¥€ हो सकता है जो गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ टà¥à¤¯à¥‚ब या अंडाशय में मवाद का संगà¥à¤°à¤¹ हो सकता है।
शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ सूजन बीमारी का इलाज कैसे किया जाता है?
पीआईडी ​​आमतौर पर कई बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से संकà¥à¤°à¤®à¤£ का परिणाम होता है। इसलिà¤, संकà¥à¤°à¤®à¤£ से निपटने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का संयोजन निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के 14 दिन के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के बाद इंजेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ का कोरà¥à¤¸ तब à¤à¥€ पूरा किया जाना चाहिठजब आप बेहतर हों, यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठकि सà¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ साफ हो गठहैं। पीआईडी ​​के गंà¤à¥€à¤° मामलों में, आईवी à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ देने के लिठअसà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होना आवशà¥à¤¯à¤• हो सकता है। यदि आपको पैलà¥à¤µà¤¿à¤• दरà¥à¤¦ कम होता है, तो à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के साथ दरà¥à¤¦ निवारक दवाà¤à¤‚ à¤à¥€ दी जा सकती हैं।
फॉलो अप करें - à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ लेने के 3 दिनों के बाद, यह जांचना आवशà¥à¤¯à¤• है कि कà¥à¤¯à¤¾ वे आपके लिठअचà¥à¤›à¤¾ काम कर रहे हैं। यदि दवाà¤à¤‚ कà¥à¤¶à¤² हैं, तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ को समापà¥à¤¤ करने के लिठयह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठà¤à¤• अनà¥à¤¯ फॉलो अप à¤à¤ªà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚टमेंट पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के अंत में की जाती है।
यौन साà¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ का इलाज करना - संकà¥à¤°à¤®à¤£ को फैलने या पà¥à¤¨à¤°à¤¾à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ से रोकने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है, à¤à¤²à¥‡ ही कोई विशिषà¥à¤Ÿ कारण की पहचान न की गई हो। उपचार के दौरान यौन संपरà¥à¤•ों से बचना चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ पीआईडी ​​इलाज योगà¥à¤¯ है?
इस बीमारी के इलाज के पीछे पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• पहचान à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारक होता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का देर से निदान अकà¥à¤¸à¤° रोगी की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है।
पीआईडी ​​के आवरà¥à¤¤à¤• à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¥‹à¤¡ के कारण निशान के ऊतकों का गठन बांà¤à¤ªà¤¨ के जोखिम को बढ़ा सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस बीमारी के कई पà¥à¤¨à¤°à¤¾à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ अकà¥à¤¸à¤° फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब के टà¥à¤¯à¥‚बल बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज का कारण बनती हैं। इससे à¤à¤• असà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का विकास à¤à¥€ हो सकता है।
विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ की सलाह:
विशेषजà¥à¤ž इस बीमारी के निदान के लिठपà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों के अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैनिंग की सलाह देते हैं। à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ आमतौर पर इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के लिठनिरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ होती हैं। पीआईडी ​​उन महिलाओं में अधिक आवरà¥à¤¤à¥€ है जिनके पास इस बीमारी का पिछला इतिहास है। आईयूडी (अंतरà¥à¤—रà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¥€ डिवाइस) का उपयोग इस बीमारी से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने का à¤à¤• अनà¥à¤¯ कारण होता है।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डिजीज के लिठघरेलू उपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
पीआईडी के घरेलू उपचार:
गंà¤à¥€à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ के मामले में कई दिनों तक बिसà¥à¤¤à¤° पर आराम करना पड़ सकता है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ने के लिठà¤à¤°à¤ªà¥‚र पानी पीना और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ खाना आवशà¥à¤¯à¤• होता है।
डौच या टैमà¥à¤ªà¥‹à¤¨ के उपयोग से बचें।
यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• दरà¥à¤¦ में है, तो वह à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤¨, इबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨, नेपà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¨ या à¤à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥‹à¤«à¥‡à¤¨ का उपयोग कर सकता है। कà¥à¤› मामलों में हीटिंग पैड à¤à¥€ मददगार हो सकते हैं।
उपचार के दौरान या उससे पहले यौन संबंधों से बचें। यदि आप à¤à¤• होने जा रहे हैं, तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ से फैलने से बचने के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है।
लकà¥à¤·à¤£ à¤à¤²à¥‡ ही चले गठहों, फॉलो अप à¤à¤ªà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚टमेंट यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठअनिवारà¥à¤¯ है कि संकà¥à¤°à¤®à¤£ ठीक हो गया है।
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